तिल का तेल

तिल का तेल अपनी स्निग्धता, कोमलता और पतलेपन के कारण शरीर के समस्त स्रोतों में प्रवेश कर धीरे-धीरे चर्बी का नाश करता है। तिल का तेल विशेष रूप से वातघ्न है। तिल का तेल वायु के रोगों को मिटाता है। तिल का तेल अन्य तेलों की अपेक्षा श्रेष्ठ है। महर्षि चरक तिल के तेल को बलवर्धक, त्वचा के लिए हितकर, गर्म एवं स्थिरता देने वाला मानते हैं।

 

तिल के तेल का औषधिय उपयोग

 

दाँत हिलना व पायरिया

दाँत हिलने पर तिल का तेल 10 मिनट मुहँ में रखने से हिलते हुए दाँत भी मजबूत हो जाते हैं और पायरिया भी मिटता है।

 

मोटापा व खाज खुजली

तिल के गुनगुने तेल से एक महीने तक मालिश करने से त्वचा में निखार आ जाता है। चर्बी कम हो जाती है और खाज खुजली पर तिल का तेल लगाने से खाज खुजली मिट जाती है।

 

एड़ियाँ फटने पर

तिल के तेल में मोम और सेंधा नमक मिलाकर एड़ी पर लगाने से एड़ियाँ मुलायम हो जाती हैं।

 

जलने पर

जले हुए भाग पर तिल का तेल गर्म करके लगाने से लाभ होता है।

 

घाव पर

तिल के तेल में पट्टी भिगोकर बाँधने से घाव ठीक हो जाता है।