त्रिफला

त्रिफला किसे कहते हैं?

आंवला, हरड़, बहेड़ा तीन वस्तुओं का मिश्रण त्रिफला कहलाता है।

 

त्रिफला का चूर्ण कैसे बनता है?

त्रिफला का चूर्ण बनाने के लिए आंवला, हरड़, बहेड़ा तीनों को समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण तैयार किया जाता है। यह चूर्ण 1 से 7 ग्राम तक सेवन किया जा सकता है।

 

त्रिफला चूर्ण के औषधीय प्रयोग

आंखों के रोग 

आंखों के सभी रोगों के लिए त्रिफला एक उत्तम अक्सीर है। इस चूर्ण को घी तथा मिश्री के साथ मिलाकर खाने से कुछ महीने में आंखों के रोग दूर होते है। जैसे नेत्रों में सूजन, जलन, दर्द, लालिमा आदि अगर आंखों में खुजली लगती हो तो त्रिफला के जल से आंखों को धोएं। त्रिफला चूर्ण का नियमित सेवन करने से नेत्र संबंधी समस्त बीमारियां ठीक होती हैं। व आंखों की ज्योति एवं तेज भी बढ़ता है।

 

त्रिफला जल बनाने की विधि 

कांच के बर्तन में 2 ग्राम त्रिफला चूर्ण 200 ग्राम जल में भिगोकर रखें 5 या 6 घंटे बाद उस जल को ऊपर से निथार कर बारीक स्वच्छ कपड़े से छान लें फिर उस जल से आंखों को धोएं अथवा उस जल में पलकें झपकाए।

 

मोटापा 

त्रिफला चूर्ण पानी में उबालकर शहद मिलाकर पीने से मोटापा कम होता है।

 

चर्म रोग 

दाद, खाज, फोड़े, फुंसी आदि चर्म रोगों में सुबह-शाम 6 से 8 ग्राम त्रिफला चूर्ण लेना हितकारी माना गया है।

 

मुख पाक (मुँह आना) 

जिन व्यक्तियों को मुंह आने की बीमारी हो अर्थात मुख पाक हो जाता हो वे रोजाना रात में 6 ग्राम त्रिफला चूर्ण पानी के साथ सेवन करें और त्रिफला जल से कुल्ला करें।

 

गर्मी के कारण त्वचा पर चकत्ते हो जाना 

त्रिफला की राख शहद में मिलाकर लगाने से राहत मिलती है।

 

अन्न दोष एवं कब्ज 

भोजन के बाद त्रिफला चूर्ण लेने से अन्न के दोष तथा वात-पित्त-कफ से उत्पन्न रोग मिटते हैं।  और कब्जियत भी नहीं रहती है।