सेब

सेब वात तथा पित्त का नाश करने वाला पुष्टिदायक, कफकारक, भारी रस तथा पाक में मधुर, ठंडा, रुचिकारक, हृदय के लिए हितकारी व पाचन शक्ति को बढ़ाने वाला है।

 

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यूनानी मत के अनुसार 

सेब हृदय मस्तिष्क यकृत तथा जठराग्नि को बल देता है, खून बढ़ाता है तथा इसका नियमित सेवन शारीरिक सौंदर्य की वृद्धि करता है।
सेब के गूदे की अपेक्षा उसके छिलके में विटामिन सी अधिक मात्रा में होता है। अन्य फलों की तुलना में सेब में फास्फोरस की मात्रा सबसे अधिक होती है। सेब में लौह तत्व भी अधिक होता है। अतः यह खून की कमी व मस्तिष्क संबंधी कमजोरी के लिए हितकारी है।
सेब में टाटीरिक एसिड होने के कारण यह आधे या एक घंटे में पच जाता है। और खाए हुए अन्य आहार को भी पचा देता है।
कुछ दिन तक केवल सेब के सेवन करने से शरीर के सभी विकार दूर होते हैं। पाचन क्रिया बलवान बनती है और शरीर में स्फूर्ति आती है। प्रातः काल खाली पेट सेब का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। सेब के सेवन से मसूड़े मजबूत होते हैं। दिमाग शांत होता है। ब्लड प्रेशर कम होता है तथा नींद अच्छी आती है।

सेब का औषधीय उपयोग

खून के विकार व त्वचा रोग

रक्त विकार या खून में खराबी के कारण बार बार फोड़े फुंसियां होती हैं पुराने त्वचा रोग के कारण चमड़ी शुष्क हो गयी हो खुजली अधिक लगती हो ऐसी अवस्था में भोजन त्यागकर केवल सेब का सेवन करने से लाभ होता है।

पाचन के रोग

सेब को अंगारे पर सेंककर खाने से अत्यंत बिगड़ी पाचनक्रिया ठीक होती है।

दाँत के रोग

दाँतों से खून आने पर सेब का रस सोडे के साथ मिलाकर दाँतों पर मलने से दाँतों से निकलने वाला खून बंद हो जाता है एवं दाँत स्वच्छ होते हैं।

सामान्य बुखार

बार-बार सामान्य बुखार आने पर भोजन का त्याग करके केवल सेब का सेवन करने से ऐसे बुखार से मुक्ति मिलती है और शरीर बलवान बनता है।

सावधानी

सेब का गुण धर्म शीतल है। इसके सेवन से कुछ लोगों को सर्दी जुकाम भी हो जाता है। किसी व्यक्ति को इसके सेवन से कब्ज भी हो जाता है। अतः अपनी प्रकृति को पहचान कर ही सेब का सेवन करें।

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