पेट दर्द और गैस

पेट दर्द क्या है?

प्रत्येक रोगी आहार-विहार में अनियमितता के कारण पेट की बीमारी का शिकार है। वायु के प्रकोप के कारण पेट के फूलने एवं अपान वायु के निकलने के कारण पेट का तनाव बढ़ जाता है। जिससे बहुत दर्द होता है और चलना भी मुश्किल हो जाता है ऐसी स्थिति को हम पेट दर्द कहते हैं।
पेट दर्द और गैस
 

 

पेट दर्द क्यों होता है एवं इसके क्या कारण है?

पेट में दर्द होने के अनेक कारण हो सकते हैं।
1. खान पान समय पर न करना।
2. देर रात को या रात्रि में देर से भोजन करना।
3. भोजन करते ही तुरंत सो जाना।
4. मैदा से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करना जैसे समोसा, भटूरे, ब्रेड, नूडल आदि एवं अधिक महीन या बारीक आटे का सेवन करना।
5. बासी भोजन करना।
6. बिना भूख लगे बिना पचे भोजन करना पहले से ही पेट में भोजन हो फिर भी कुछ ना कुछ ऐसे में खाते रहना ऐसा करने से पेट में दर्द होने लगता है।
7. भूख रोकने से अथवा भूख लगने पर भी ना खाने से पेट में दर्द होता है और सिर में चक्कर आते हैं।
8. पचने में भारी सब्जियों का सेवन करने से जैसे गोभी अरबी बैंगन भिंडी आदि के खाने से वात का प्रकोप बढ़ जाता है जिससे पेट में दर्द होने लगता है।

क्या पेट दर्द में अंकुरित चना खा सकते हैं?

पेट दर्द में अंकुरित चना नहीं खा सकते क्योंकि अंकुरित चना पचने में भारी होता है।

चावल खाने के बाद यदि पेट में दर्द हो तो क्या करें?

चावल खाने के बाद यदि पेट में दर्द हो तो 2 ग्राम सोंठ 1 ग्राम सेंधा नमक 1 ग्राम हींग पीसकर गुनगुने पानी के साथ लेने से पेट दर्द में आराम होता है।

पेट दर्द और गैस में क्या खाना चाहिए?

अगर किसी को पेट दर्द किसी विशेष पदार्थ के खाने पर होता है तो उस पदार्थ का सेवन ना करें। पेट दर्द में अजवाइन एवं काला नमक को बराबर मात्रा में मिलाकर अजवाइन को पीस लें। इस मिश्रण को एक चम्मच भर लें और गुनगुने या गर्म पानी के साथ लेने से पेट दर्द में आराम होता है।

गैस में क्या ले?

प्रातः काल एक ग्लास पानी में 20-25 ग्राम पुदीने का रस व 20-25 ग्राम शहद मिलाकर पीने से गैस की बीमारी में विशेष लाभ होता है।

अम्लता व सीने में जलन का उपचार?

अम्ल पित्त वाले व्यक्तियों के लिए खुली हवा में घूमना विशेष रूप से लाभदायक है। जिनको अधिक अम्ल बनता है वे व्यक्ति भोजन में कड़वे-मधुर व कसैले पदार्थों का सेवन विशेषकर करें।
कड़वा रस – अपक्व आहार बिना पचा भोजन का पाचन करता है।
कसैला रस – पित्त की बढ़ी हुई मात्रा को घटाता है।
मधुर रस – पित्त का शमन (शांत) करता है बढे हुए पित्त की मात्रा को कम करता है।

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