परवल

परवल को सभी सब्जियों में सबसे अच्छा माना गया है। आयुर्वेद में एकमात्र परवल को ही वर्ष भर वर्षभर पथ्य के रूप में स्वीकार किया गया है। क्योंकि परवल गुण में हल्के, पाचक, गरम, स्वादिष्ट, हृदय के लिए हितकर, जठराग्नि वर्धक, स्निगधतावर्धक, पौष्टिक, विकृत कफ को बाहर निकालने वाला और त्रिदोष नाशक है। परवल सर्दी, खांसी, बुखार, पेट के कीड़े, रक्त दोष व खून की कमी को दूर करता है।
परवल दो प्रकार के होते हैं। मीठे और कड़वे। परवल सब्जी के लिए सदैव मीठे, कोमल बीज वाले और सफेद गूदे वाले परवल का उपयोग किया जाता है। जो परवल ऊपर से पीले तथा कड़क बीज वाले हो जाते हैं उनकी सब्जी अच्छी मानी जाती है।

 

परवल

 

परवल का औषधीय उपयोग

ह्रदय रोग व शरीर की पुष्टि

परवल की सब्जी को घी अथवा सरसों के तेल में बनाकर प्रतिदिन सेवन करने से हृदय रोग में लाभ होता है तथा शरीर का वजन भी बढ़ता है।

कफ का बढ़ना

डंठल के साथ मीठे परवल के 6 ग्राम पत्ते व 3 ग्राम सोंठ को लेकर एक बड़े गिलास को पानी से भरकर परवल के पत्ते व सोंठ डालकर भिगोने में पानी सहित उबालें इसे इतना उबाले की पानी आधे में से आधा रह जाए इस काढ़े में दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से कफ सरलता से निकल जाता है।

आम दोष

जिन व्यक्तियों को पेट में आम दोष की परेशानी होती है वे व्यक्ति परवल के टुकड़ों को पानी में उबालें उबालते समय पानी में सोंठ का टुकड़ा पीपरामूल, लेडी पीपर, काली मिर्च, जीरा में नमक डालें पानी का चौथाई भाग शेष रहने पर सुबह-शाम इसका सेवन करने से आम दोष में लाभ होता है।

रक्त विकार

खून में खराबी होने प्रतिदिन परवल की सब्जी में धनिया, जीरा, काली मिर्च और हल्दी डालकर घी में तड़का लगाकर सब्जी का सेवन करना चाहिए।

सावधानी

गर्म तासीर वालों के लिए परवल का अधिक सेवन हानिकारक है।

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