गुड

गुड गन्ने के रस को पकाकर बनाया जाता है। गुड रसायनों के मिश्रण से रहित होने के कारण स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। अक्टूबर के महीने से लेकर फरवरी मार्च तक ताजा गुड भरपूर मात्रा में मिलता है। गन्ने के रस से चीनी बनाने में कैल्शियम, लौह तत्व, गंधक, पोटेशियम फॉस्फोरस आदि महत्वपूर्ण तत्व नष्ट हो जाते हैं जबकि गुड में ये तत्व मौजूद रहते हैं। शरीर में खून की कमी होने पर या शरीर से खून बह जाने पर खून में हीमोग्लोबिन कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में गुड़ का नियमित सेवन करने से इस कमी की पूर्ति की जा सकती है क्योंकि गुड में 114 प्रतिशत मिलीग्राम लौह तत्व पाया जाता हैं।

 

महिलाओं में आमतौर पर लौह तत्व की कमी पायी जाती है। भुने हुए चने के साथ गुड़ का सेवन करने से इस कमी को पूरा किया जा सकता है। गुड चिक्की के रूप में भी काफी प्रचलित है। गुड़ की प्रकृति गर्म होने के कारण सर्दियों के दिनों में अधिक मात्रा में सेवन किया जाता है। गुड पाचक भी है खाना खाने के बाद 50 ग्राम गुड़ का सेवन कर सकते हैं।

 

गुड में कैल्शियम होने के कारण बच्चों की हड्डियों की कमजोरी में यह बहुत लाभकारी है। बढ़ते बच्चों के लिए यह अमृत तुल्य है। गुड में विटामिन बी पर्याप्त मात्रा में होता है। गुड में पोर्ट पेन्टोथिनिक एसिड, इनासिटोल सबसे अधिक है जो कि स्वास्थ्य के लिए हितकारी है।