गाजर

गाजर स्वाद में मधुर, कसैली, तीक्ष्ण, गरम, मूत्रल, दस्त ठीक करने वाली, खून साफ करने वाली, पेशाब खुलकर लाने में सहायक, कफ निकालने वाली, वातदोषनाशक, पुष्टिवर्धक तथा दिमाग एवं नस नाड़ियों के लिए बल प्रदान करने में सहायक है।
गाजर अफारा पेट के रोग, पथरी सूजन, खाँसी, पेशाब की जलन तथा दुर्बलता का नाश करने वाली है।
gajar
गाजर को कच्चा खाने से अधिक लाभ होता है। गाजर के अंदर का पीला भाग निकालकर इसका सेवन करना चाहिए क्योंकि यह अत्यधिक गर्म होता है।
गाजर में आलू से छह गुना अधिक कैल्शियम होता है। कैल्शियम एवं कैरोटीन की प्रचुर मात्रा होने के कारण छोटे बच्चों के लिए यह उत्तम आहार है।
गाजर में आँतो के हानिकारक जंतुओं को नष्ट करने का अद्भुत गुण पाया जाता है।इसमें विटामिन ए काफी मात्रा में पाया जाता है। अतः इसका सेवन आंखों के रोगों में भी लाभदायक है।
गाजर खून को साफ करती है। इसके सेवन से त्वचा के रोगों में भी लाभ होता है। गाजर में लौह तत्व प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। गाजर को खूब चबाकर खाने से दाँत व मसूड़े मजबूत होते हैं और दाँत स्वच्छ एवं चमकदार भी बनते हैं।

सावधानी

अत्यधिक मात्रा में गाजर खाने से पेट में दर्द हो जाता है। गाजर के अंदर का पीला भाग खाने से यह छाती में जलन पैदा करता है।
अतः पित्त प्रकृति वाले लोगों को गाजर का कम एवं सावधानीपूर्वक सेवन करना चाहिए।

गाजर का औषधीय उपयोग

दिमागी कमजोरी

गाजर के रस का रोजाना सेवन करने से दिमागी कमजोरी दूर होती है।

हिचकी

गाजर के रस की चार पाँच बूंदे दोनों नथुनों में डालने से लाभ होता है।

आँखों के रोग

पढ़ते समय आँखों में परेशानी होना, कम दिखाई देना आदि रोगों में कच्ची गाजर चबाकर खाना या गाजर के रस का सेवन नियमित करने से लाभ होता है।

पाचन संबंधी गड़बड़ी

अरुचि, मंदाग्नि, अपच आदि पेट के रोगों में गाजर के एक एक गिलास रस में नमक, हरा धनिया, जीरा, काली मिर्च, नींबू का रस डालकर पीने से पाचन संबंधी गड़बड़ी ठीक होती है।

जलने पर

चलने से होने वाली दाह में जले हुए प्रभावित अंग पर बार-बार गाजर का रस लगाने से आराम मिलता है।

पेशाब की परेशानी

गाजर का रस पीने से पेशाब खुलकर आता है और खून में शर्करा की मात्रा कम होती है।

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