फालसा – falsa फल

गर्मी के दिनों में फालसा एक उत्तम पौष्टिक फल है। फालसा शरीर को निरोगी एवं हष्टपुष्ट बनाता है।  वैज्ञानिक दृष्टि से फालसे में विटामिन सी एवं केरोटीन तत्व भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

फालसा स्निग्ध, चिकना, मधुर, खट्टा और तिक्त होता है। फालसे के पके फल स्वाद में मधुर, स्वादिष्ट, पचने में हल्के, गर्मी शांत करने वाले, उल्टी मिटाने वाले, दस्त में सहायक व पेट के लिए शक्ति दायक एवं हृदय के लिए अत्यंत लाभदायक हैं।

फालसा रक्त पित्त नाशक, वात शामक, कफ को हरने वाला हिचकी व श्वास की तकलीफ में भी लाभकारी है। गर्मियों के दिनों में शरीर में होने वाली गर्मी, जलन तथा पेट एवं दिमाग की कमजोरी फालसे के सेवन से दूर होती है।

फालसे के औषधीय उपचार

पेट का दर्द

पेट दर्द के लिए अजवायन को सेंककर 3 ग्राम की मात्रा लेकर 25 या 30 ग्राम फालसे के रस में मिलाकर हल्का सा गर्म करके पीने से पेट दर्द में आराम मिलता है।

पित्त विकार या पित्तदोष

गर्मी के कारण होने वाले रोग जैसे आंखों की जलन, पेशाब की जलन, पेट की जलन, खट्टी डकार आदि की परेशानी में फालसे के रस का शर्बत बनाकर पीने से पित्त विकार मिटते हैं और अधिक गर्मी से राहत मिलती है।

पेट की कमजोरी

पके हुए फालसे के रस में गुलाब जल एवं मिश्री मिलाकर रोज पीने से पेट की कमजोरी दूर होती है और उल्टी, पेट दर्द, जी मिचलाना आदि परेशानी दूर होती है एवं रक्त दोष भी ठीक होता है।

दिमाग की कमजोरी कुछ दिनों तक नाश्ते के स्थान पर फालसे का रस उपयुक्त मात्रा में पीने से दिमाग की कमजोरी व सुस्ती दूर होती है। शरीर में फुर्ती व शक्ति का संचार होता है।

श्वास, हिचकी व कफ दोष

कफ दोष से होने वाली परेशानी में सर्दी, श्वास व हिचकी में फालसे का रस हल्का गर्म करके उसमें थोड़ा अदरक का रस व सेंधा नमक डालकर पीने से कफ बाहर निकल जाता है तथा सर्दी, श्वास की तकलीफ व हिचकी मिट जाती है।

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