आँवला

आँवला एक उत्तम औषधि है। जब ताजे आँवले मिलते हो तब इनका सेवन सबके लिए लाभदायक है। ताजे आँवले का सेवन हमें कई रोगों से बचाता है। कच्चे आँवले को सुखाकर उसका चूर्ण बनाया जाता है और कच्चे आंवले को चीनी की चाशनी में पकाकर उसका मुरब्बा बनाया जाता है। चवनप्राश भी बनाया जाता है जो कि वर्षभर उपयोग किया जा सकता है।

 

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आयुर्वेद के अनुसार आँवले थोड़े खट्टे, कसैले, मीठे, ठंडे हल्के, त्रिदोष वात, पित्त, कफ का नाश करने वाले खून साफ करने वाले रुचिकर, मूत्रल, पौष्टिक, बालों की वृद्धि में सहायक टूटी हड्डी जोड़ने में सहायक शारीरिक सौंदर्य को बढ़ाने वाले, आंखों की ज्योति बढ़ाने वाले, गर्मी का नाश करने वाले एवं दाँतों को मजबूती प्रदान करने वाले होते है।
आँवला एक श्रेष्ठ रसायन है। आँवला शरीर में रस रक्तादि सप्तधातुओं को पुष्ट करता है। आँवले के सेवन से आयु, स्मृति, शारीरिक तेज व बल बढ़ता है। ह्रदय एवं मस्तिष्क को शक्ति मिलती है। आंखों की रोशनी बढ़ती है और बालों की जड़ें मजबूत होती हैं।
आँवला श्वास, खांसी, अजीर्ण, दस्त, शरीर की गर्मी, बवासीर, पीलिया एवं टी बी जैसे रोगों में लाभदायक होता है।

आँवले का औषधीय उपयोग

कब्ज

गर्मी के कारण हुई कब्ज में आँवले का 3 से 5 ग्राम चूर्ण घी एवं मिश्री के साथ चाटने से कब्ज ठीक होता है।

दूसरा उपयोग

त्रिफला चूर्ण जो कि हरड़, बहेड़ा, आँवला तीनों की समान मात्रा लेकर बनाया जाता है रात को खाना खाने के बाद इस चूर्ण को आधा से एक चम्मच पानी के साथ सेवन करने से कब्ज ठीक होता है।

सिर दर्द

आँवले के तीन से पांच ग्राम चूर्ण को घी एवं मिश्री मिलाकर सेवन करने से पित्त तथा वायु दोष से उत्पन्न सिर दर्द में राहत मिलती है।

अत्यधिक पसीना आना

हाथ पैरों में अधिक पसीना आता हो तो प्रतिदिन आंवले के बीस से तीस मिलीलीटर रस में मिश्री डालकर पियें अथवा रात्रि में त्रिफला चूर्ण का सेवन करें भोजन में गर्म खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।

दांतो की मजबूती

आँवले के चूर्ण को पानी में उबालकर उस पानी से कुल्ला करने से दांत मजबूत एवं स्वच्छ होते हैं।

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