तुलसी

तुलसी एक सर्वपरिचित एवं सर्वसुलभ वनस्पति है। भारतीय धर्म एवं संस्कृति में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। केवल भारत में ही नहीं अपितु विश्व के अनेक देशों में भी तुलसी को पूजनीय एवं शुभ माना जाता है।  तुलसी दो प्रकार की होती है। हरे पत्ते वाली राम तुलसी कहलाती है और गहरे रंग के पत्तों वाली …

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हल्दी

प्राचीन काल से ही भोजन में और घरेलू उपचार के रूप में हल्दी का प्रयोग होता रहा है। अनेक मांगलिक कार्यों में भी हल्दी का प्रयोग किया जाता है।   आयुर्वेद के मतानुसार हल्दी कसैली, कड़वी, गरम, उष्णवीर्य, पचने में हल्की, शरीर के रंग को साफ करने वाली, वात-पित्त-कफ नाशक, त्वचा रोग नाशक, खून बढ़ाने …

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बादाम

बादाम गुण में गर्म, वायु को दूर करने वाला, शरीर को पुष्टि व बल प्रदान करने वाला है। किंतु बादाम पित्त एवं कफ को बढ़ाने वाला, पचने में भारी होता है।   बादाम के औषधीय उपयोग   शरीर की पुष्टि के लिए रात को चार से पांच बादाम पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इनका …

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सूखे मेवे

सूखे मेवे में बादाम, अखरोट, काजू , किशमिश, अंजीर, पिस्ता, छुआरे, चारोली, नारियल आदि का समावेश है।   सूखे मेवे अर्थात ताजे फलों के उत्तम भागों को सुखाकर बनाया गया पदार्थ सूखे मेवे कहलाते हैं। ताजे फलों का बारह महीने मिलना मुश्किल है। सूखे मेवों से दूसरी ऋतु में भी फलों के उत्तम गुणों का …

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गुड

गुड गन्ने के रस को पकाकर बनाया जाता है। गुड रसायनों के मिश्रण से रहित होने के कारण स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। अक्टूबर के महीने से लेकर फरवरी मार्च तक ताजा गुड भरपूर मात्रा में मिलता है। गन्ने के रस से चीनी बनाने में कैल्शियम, लौह तत्व, गंधक, पोटेशियम फॉस्फोरस आदि महत्वपूर्ण तत्व …

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तिल का तेल

तिल का तेल अपनी स्निग्धता, कोमलता और पतलेपन के कारण शरीर के समस्त स्रोतों में प्रवेश कर धीरे-धीरे चर्बी का नाश करता है। तिल का तेल विशेष रूप से वातघ्न है। तिल का तेल वायु के रोगों को मिटाता है। तिल का तेल अन्य तेलों की अपेक्षा श्रेष्ठ है। महर्षि चरक तिल के तेल को …

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मेथी

आहार में हरी सब्जियों का विशेष महत्व है। आधुनिक विज्ञान के मत अनुसार हरे पत्तेवाली सब्जियों में क्लोरोफिल नामक तत्व रहता है। यह तत्व जंतुओं का प्रबल नाशक है। दाँत एवं मसूढ़ों में सड़न पैदा करने वाले जंतुओं को यह नष्ट करता है। हरी सब्जियों में लौह तत्व काफी मात्रा में पाया जाता है। जो …

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लौंग

लौंग का उपयोग मसालों एवं सुगंधित पदार्थों में अधिक होता है। लौंग का तेल भी निकाला जाता है। लौंग में मुख, आमाशय एवं आँतों में रहने वाले सूक्ष्म कीटाणुओं का नाश करने एवं सड़न को रोकने का गुण है।   लौंग का गुणधर्म लौंग लघु, कड़वा, रुचिकर, तीक्ष्ण, विपाक में मधुर, पाचक, अग्नि जगाने वाली, …

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हरड़ हरीतकी

भारत में विशेषकर हिमालय में कश्मीर से आसाम तक हरड़ के वृक्ष पाए जाते हैं। आयुर्वेद ने हरड़ को अमृता, प्राणदा, कायस्था, विजया, मेध्या आदि नामों से गौरवान्वित किया है। हरड एक श्रेष्ठ रसायन है। हरड़ में लवण को छोड़कर मधुर, अम्ल, कटु, तिक्त, कषाय ये पाँचों रस पाए जाते हैं। यह लघु, रूक्ष, विपाक …

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दालचीनी

भारत में दालचीनी के वृक्ष हिमालय तथा पश्चिमी तट पर पाए जाते हैं। इन वृक्षों की छाल दालचीनी के नाम से प्रसिद्ध है। यह रस में तीखी, कड़वी तथा मधुर होती है। उष्ण तीक्ष्ण होने के कारण पाचन करती है और विशेष रूप से कफ का नाश करने वाली है। यह अपने मधुर रस से …

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परवल

परवल को सभी सब्जियों में सबसे अच्छा माना गया है। आयुर्वेद में एकमात्र परवल को ही वर्ष भर वर्षभर पथ्य के रूप में स्वीकार किया गया है। क्योंकि परवल गुण में हल्के, पाचक, गरम, स्वादिष्ट, हृदय के लिए हितकर, जठराग्नि वर्धक, स्निगधतावर्धक, पौष्टिक, विकृत कफ को बाहर निकालने वाला और त्रिदोष नाशक है। परवल सर्दी, …

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धनिया

धनिया सर्वत्र प्रसिद्ध है। भोजन बनाने में इसका प्रतिदिन उपयोग होता है। हरा धनिया जब पूरा विकसित हो जाता है तो उस पर हरे रंग के बीज की फलियां लगती हैं जब वे फलियां सूख जाती हैं तो उनसे निकला हुआ बीज सूखा धनिया या साबुत धनिया कहलाता है। सभी प्रकार की सब्जियों व दाल …

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अदरक

अदरक का गुण धर्म अदरक रुखा, तीखा, उक्ष्ण तीक्ष्ण होने के कारण कफ तथा वात का नाश करता है, पित्त को बढ़ाता है। इसका अधिक सेवन रक्त को पुष्ट करता है। यह उत्तम आम पाचक है आम से उत्पन्न होने वाले अजीर्ण, अफारा, पेट दर्द, उल्टी आदि रोगों में तथा कफ जनित रोगों में जैसे …

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गाजर

गाजर स्वाद में मधुर, कसैली, तीक्ष्ण, गरम, मूत्रल, दस्त ठीक करने वाली, खून साफ करने वाली, पेशाब खुलकर लाने में सहायक, कफ निकालने वाली, वातदोषनाशक, पुष्टिवर्धक तथा दिमाग एवं नस नाड़ियों के लिए बल प्रदान करने में सहायक है। गाजर अफारा पेट के रोग, पथरी सूजन, खाँसी, पेशाब की जलन तथा दुर्बलता का नाश करने …

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अमरूद

अमरूद आमतौर से पूरे भारत में पाया जाने वाला फल है। अमरुद सस्ता एवं गुणकारी फल है। संस्कृत में इसे अमृत फल भी कहा गया है। आयुर्वेद के अनुसार पका हुआ अमरूद स्वाद में खट्टा, मीठा, कसैला, गुण में ठंडा, पचने में भारी, कब्ज तथा रुचिकारक पित्तदोषनाशक एवं हृदय के लिए हितकर है।   अमरूद …

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सेब

सेब वात तथा पित्त का नाश करने वाला पुष्टिदायक, कफकारक, भारी रस तथा पाक में मधुर, ठंडा, रुचिकारक, हृदय के लिए हितकारी व पाचन शक्ति को बढ़ाने वाला है।     यूनानी मत के अनुसार  सेब हृदय मस्तिष्क यकृत तथा जठराग्नि को बल देता है, खून बढ़ाता है तथा इसका नियमित सेवन शारीरिक सौंदर्य की …

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सीताफल

सीताफल अगस्त से नवम्बर के महीने में मिलने वाला फल है। यह एक स्वादिष्ट फल है। आयुर्वेद के अनुसार सीताफल शीतल, पित्तशामक, कफ वर्धक, गर्मी नाशक, पोस्टिक मांस एवं खून बढ़ाने वाला, उल्टी बंद करने वाला, बलवर्धक, वातदोषनाशक एवं हृदय के लिए हितकर है। वैज्ञानिक दृष्टि से सीताफल में कैल्शियम, लौह तत्व, फास्फोरस, विटामिन, थायमीन, …

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आँवला

आँवला एक उत्तम औषधि है। जब ताजे आँवले मिलते हो तब इनका सेवन सबके लिए लाभदायक है। ताजे आँवले का सेवन हमें कई रोगों से बचाता है। कच्चे आँवले को सुखाकर उसका चूर्ण बनाया जाता है और कच्चे आंवले को चीनी की चाशनी में पकाकर उसका मुरब्बा बनाया जाता है। चवनप्राश भी बनाया जाता है …

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जामुन

जामुन पचने मे हल्का, स्वाद में खट्टा, मीठा व जठराग्नि को तीव्र करने में सहायक है। जामुन वर्षा ऋतु में होने वाले पेट के रोगों में उपयोगी है। जामुन में लौह तत्व पर्याप्त मात्रा में होता है। अतः पीलिया के रोगियों के लिए जामुन का सेवन हितकारी है। जामुन का सेवन यकृत के रोगों को …

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त्रिफला

त्रिफला किसे कहते हैं? आंवला, हरड़, बहेड़ा तीन वस्तुओं का मिश्रण त्रिफला कहलाता है।   त्रिफला का चूर्ण कैसे बनता है? त्रिफला का चूर्ण बनाने के लिए आंवला, हरड़, बहेड़ा तीनों को समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण तैयार किया जाता है। यह चूर्ण 1 से 7 ग्राम तक सेवन किया जा सकता है।   त्रिफला …

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लू लगने पर घरेलू उपचार – Lu lagne ke lakshan

लू किसे कहते है? गर्मी के दिनों में जो गर्म हवा चलती है खास तौर से मई जून के महीने में चलने वाली गर्म हवाओं को लू कहते है। लू क्यों लगती है? गर्मी के दिनों में सूर्य की किरणें अत्यंत उष्ण (गर्म) हो जाती हैं। इनके संपर्क से हवा रुक्ष (सूखी) हो जाती है। …

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सर्दी जुकाम का घरेलू उपचार

सर्दी जुकाम को ठीक करने के घरेलु उपचार पहला प्रयोग सर्दी जुकाम में 2 ग्राम पिसी हुई सोंठ दूध में उबालकर सेवन करना चाहिए।   दूसरा प्रयोग  सर्दी जुकाम होने पर तुलसी के रस में अदरक का रस मिलाकर सेवन करने से सर्दी में लाभ होता है। मात्रा -10 मिलीलीटर तुलसी का रस, 15 मिलीलीटर …

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तत्काल कब्ज राहत – Kabj ka ilaj

कब्ज क्या है? कब्ज के रोगी खान-पान में असयंम के कारण कब्ज का शिकार होते हैं। कब्ज से ही अनेक बीमारी होती हैं। भोजन के पश्चात जब हमें मल त्याग की क्रिया ठीक न हो अर्थात हमारा पेट साफ न हो तो उसे कब्जे कहते हैं।     कब्ज होने के दुष्परिणाम क्या हैं? कब्ज …

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पेट दर्द और गैस

पेट दर्द क्या है? प्रत्येक रोगी आहार-विहार में अनियमितता के कारण पेट की बीमारी का शिकार है। वायु के प्रकोप के कारण पेट के फूलने एवं अपान वायु के निकलने के कारण पेट का तनाव बढ़ जाता है। जिससे बहुत दर्द होता है और चलना भी मुश्किल हो जाता है ऐसी स्थिति को हम पेट …

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पुदीना

पुदीने का उपयोग अधिकतर चटनी या मसाले के रूप में किया जाता है।  पुदीना एक सुगंधित एवं उपयोगी औषधि है। यह अपच को मिटाता है। पुदीना खाने में स्वादिष्ट पचने में हलका तीक्ष्ण, तीखा, कड़वा, उल्टी मिटाने वाला, शक्ति बढ़ाने वाला, वायु नाशक, फेफड़ों में जमे हुए कफ को बाहर निकालने वाला, अरुचि, मंदाग्नि, अफारा, …

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तरबूज

तरबूज गर्मी के मौसम का फल है। तरबूज लगभग पूरे भारत में पाया जाता है। पका हुआ लाल गूदे वाला तरबूज स्वाद में मीठा या मधुर गुण में शीतल, पित्त एवं गर्मी का शमन करने वाला, पौष्टिकता एवं तृप्ति देने वाला, पेट साफ करने वाला, खुलकर पेशाब लाने वाला है। तरबूज के बीजों का भी …

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पपीता

पपीता फरवरी-मार्च एवं मई से अक्टूबर तक के महीने में अधिक मात्रा में मिलने वाला फल है।   पके हुए पपीते से मिलने वाले लाभ इस प्रकार हैं – पका हुआ पपीता स्वाद में मधुर, पित्त दोष नाशक, पचने में भारी, गुण में गर्म, पेट साफ करने वाला, हृदय के लिए हितकारी, आंतों के कीड़ों …

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अनार खाने के फायदे – Anar ke fayde

मीठा अनार तीनों दोषों का शमन करने वाला तृप्ति प्रदान करने वाला कसैले रस वाला, बल प्रदान करने वाला, जलन व कमजोरी को दूर करने वाला है। अनार से मिलने वाले लाभ अनार खाने से पेट के कीड़ों का नाश होता है। मीठे अनार का सेवन हृदय को बल देने के लिए बहुत उपयोगी है।अनार …

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खांसी के घरेलू उपाय

खांसी हो जाने पर शीतोपलादि चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करें। मात्रा 1 ग्राम चूर्ण में आधा चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करें। खांसी हो जाने पर चार से पांच लॉन्ग को घी में भूनकर तुलसी के पत्तों के साथ चबाने से सभी प्रकार की खांसी …

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पत्थर बेल के फायदे – Bel pathar ke fayde

वह बेल जो रोगों का नाश करें। पत्थर बेल के नियमित सेवन से शरीर सुडौल बनता है। पत्थर बेल की जड़ उसकी शाखाएं पत्ते, छाल और फल ये सभी औषधियां हैं। पत्थर बेल में हृदय को ताकत और दिमाग को ताजगी देने के साथ-साथ सात्विकता प्रदान करने का भी श्रेष्ठ गुण है। यह स्निग्ध (मीठा) …

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जौ के फायदे – Jau ka sattu

जौ क्या होता है? जौ का उपयोग काफी लंबे समय से होता चला आ रहा है। जौ एक प्रकार का अनाज है। यह गेहूं की अपेक्षा हल्का अनाज होता है।   जौ का सत्तू कैसे बनाया जाता है? जौ को भूनकर पीसकर उसके आटे में थोड़ा सैंदा नमक और पानी मिलाकर सत्तू बनाया जाता है …

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निम्बू का उपयोग – Nimbu ke fayde

गर्मी में नींबू का उपयोग किन किन रूपों में किया जाता है? गर्मी के मौसम में नींबू का शरबत बनाकर पिया जाता है जैसे शिकंजी या नींबू पानी। नींबू का रस स्वादिष्ट व पाचक होने के कारण स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी होता है।   नींबू के क्या क्या गुण होते हैं? गुणों की दृष्टि …

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दांतों का इलाज – Dant ka dard

दांत जल्दी गिरने के क्या कारण होते हैं? खूब ठंडा पानी पीने से या ठंडे पदार्थों का सेवन करने से दांत जल्दी गिर जाते हैं। जब हम ठन्डे पदार्थो के सेवन के तुरंत बाद गर्म पदार्थो का सेवन करते है या गर्म पदार्थो के सेवन के तुरंत बाद ठन्डे पदार्थो का सेवन करते है तो …

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उल्टी रोकने के उपाय – Ulti ka ilaj

उल्टी क्यों लगती है? गलत खान-पान की पद्धति से हमें उल्टी लग जाती है। बिना भूख के खा लेने से अथवा यदि पेट में पहला आहार पचा न हो और हम इसी दौरान दूसरा आहार ग्रहण करें तो पहले आहार का कच्चा रस इसके साथ मिलकर दोष उत्पन्न कर देता है जिससे हमें उल्टी हो …

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आम खाने के फायदे – Aam ke fayde

आम गर्मी की ऋतु का फल है। आम मई, जून, जुलाई और अगस्त के महीनों में भरपूर मात्रा में मिलने वाला फल है। आम को फलों का राजा भी कहते हैं। पका हुआ आम दुबले-पतले बच्चो, बूढ़े व्यक्तियों को व कमजोर लोगों को पुष्ट बनाने के लिए सर्वोत्तम खाद्य फल है। पका हुआ आम खाने …

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फालसा – falsa फल

गर्मी के दिनों में फालसा एक उत्तम पौष्टिक फल है। फालसा शरीर को निरोगी एवं हष्टपुष्ट बनाता है।  वैज्ञानिक दृष्टि से फालसे में विटामिन सी एवं केरोटीन तत्व भरपूर मात्रा में पाया जाता है। फालसा स्निग्ध, चिकना, मधुर, खट्टा और तिक्त होता है। फालसे के पके फल स्वाद में मधुर, स्वादिष्ट, पचने में हल्के, गर्मी …

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